संभल का सच : दीपावली पर नीलकंठ को पुकारने वाली बेटी, आज बुर्के में मौलवियों से बढ़कर करती है तकरीर
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Yugvarta
, Aug 30, 2025 11:43 AM 0 Comments
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Lucknow / Sambhal : लखनऊ, 30 अगस्त। योगी सरकार द्वारा सम्भल हिंसा की जांच को लेकर गठित न्यायिक जांच समिति की जो रिपोर्ट लीक हुई है, उसमें एक मार्मिक और चौंकाने वाला सच सामने आया है। रिपोर्ट में दर्ज बयानों से पता चला है कि सम्भल के एक हिन्दू परिवार ने अपनी बेटी को लव जिहाद में खो दिया। धार्मिक और संस्कारवान बेटी पहले परिवार की शान थी, लेकिन 2013-14 में जब उसका विवाह मुस्लिम युवक से हुआ, तो वह न केवल अपने धर्म और घर-परिवार से दूर हो गई बल्कि परिवार पर अपमान और पीड़ा का ऐसा बोझ डाल गई, जिससे वे आज
न्यायिक जांच समिति की रिपोर्ट में सम्भल से लव जिहाद का बड़ा खुलासा
धार्मिक संस्कारों वाली भारती बनी ‘सिदरा’, परिवार पर टूटा गहरा संकट
पीजी में उर्दू किताबें मिलीं, सहेलियों ने बताया रोज जाती थी हम्माद के साथ
इलाहाबाद हाईकोर्ट में बेटी ने लड़के के पक्ष में दिया बयान, केस हार गया परिवार
फैसले के बाद भव्य दावत-ए-वलीमा, हिन्दू परिवारों को अपमानित कर पलायन के लिए दबाव
दस वर्षों से बीमार है मां, परिवार अब भी बेटी को अपनाने को तैयार
तक उबर नहीं पाए हैं। सूत्र बता रहे हैं कि लीक रिपोर्ट में सम्भल से जुड़े कई और मामले सामने आ रहे हैं।
धार्मिक संस्कारों वाली बेटी पर टूटा संकट-
किशन लाल जी ने समिति को बताया कि उनकी छोटी पुत्री भारती, जिसे अब सिदरा कहा जाता है, बचपन से ही धार्मिक संस्कारों वाली थी। वह व्रत-उपवास रखती थी, दीपावली पर नीलकंठ को आवाज देती थी, प्याज-लहसुन तक नहीं खाती थी और मंदिर की प्रतिमाओं के लिए अपने हाथों से पोशाकें सिलती थी। लेकिन 2013-14 में सम्भल के दीपा सराय निवासी मो. हम्माद (तुर्क) से विवाह के बाद सब कुछ बदल गया।
पढ़ाई के दौरान संपर्क में आया युवक-
भारती ने यमुनानगर से बी.बी.ए. और गाजियाबाद से एम.बी.ए. की पढ़ाई की। इसी दौरान उसका संपर्क मो. हम्माद से हुआ। दिल्ली में जिस पीजी में वह रहती थी, वहाँ उसके कमरे से उर्दू की किताबें मिलीं और सहेलियों ने बताया कि वह रोज शाम को हम्माद के साथ घूमने जाती थी। परिवार का कहना है कि बेटी पर तंत्र विद्या का असर डाला गया। एक मौके पर वहां गोल पात्र में रखी मछली देखकर मर्मज्ञ ने चेतावनी दी कि इसे छूना विपत्ति को आमंत्रण देना होगा।
कोर्ट में हार और परिवार का टूटना-
यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंचा। लेकिन जब बेटी ने अदालत में हम्माद के पक्ष में बयान दिया तो परिवार केस हार गया। परिजनों का कहना है कि यह उनके जीवन का सबसे बड़ा आघात था, जिसने सब कुछ बिखेर दिया।
भव्य दावत-ए-वलीमा बनी अपमान का साधन-
रिपोर्ट में दर्ज है कि फैसले के बाद हम्माद के परिवार ने सम्भल में भव्य दावत-ए-वलीमा का आयोजन किया। परिजनों ने आरोप लगाया कि ऐसे आयोजन का उद्देश्य हिन्दू परिवार को धार्मिक और सामाजिक रूप से अपमानित करना था। उनका कहना है कि सम्भल में जब भी कोई हिन्दू लड़की मुस्लिम युवक से विवाह करती थी, तो बड़े स्तर पर दावत आयोजित कर हिन्दू परिवारों को पलायन के लिए मजबूर किया जाता था।
पूरी तरह बदल गई जिंदगी-
आज भारती/सिदरा पूरी तरह इस्लामी रीति-रिवाजों का पालन करती है। वह बुर्का पहनती है और मदरसों में धार्मिक भाषण देती है। परिवार के अनुसार, अब वह मुस्लिम मौलवियों से भी अधिक प्रभावशाली तकरीर करती है। पति बेरोजगार है, जिसने कई नौकरियाँ कीं लेकिन टिक नहीं पाया। फिलहाल घर पर कपड़ों की दुकान और बुटीक चलता है। दंपती की दो बेटियां हैं।
आंसुओं भरी पुकार लेकिन मदद न मिली-
परिजनों ने बताया कि विवाह के एक वर्ष बाद भारती ने फोन कर रोते हुए कहा, “मुझे बचा लो।” लेकिन डर और धमकियों के कारण परिवार कुछ कर नहीं सका। उसकी आवाज में दर्द और पीड़ा झलक रही थी, जो आज तक अनकही रह गई है।
मां का टूटा मन, अब भी इंतजार-
इस पूरे घटनाक्रम ने सबसे ज्यादा आघात उसकी मां को पहुंचाया। वे दस वर्षों से बीमार हैं, डिप्रेशन में हैं और बोलने तक की स्थिति में नहीं हैं। परिवार ने न्यायिक जांच समिति को कहा कि वे आज भी अपनी बेटी को अपनाने को तैयार हैं।
सम्भल की यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि न्यायिक जांच रिपोर्ट ने इसे लव जिहाद के सुनियोजित षड्यंत्र की कड़ी बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे मामलों से हिन्दू समाज को अपमानित कर पलायन के लिए विवश किया गया, जिससे सम्भल की डेमोग्राफी बदली और सामाजिक तनाव गहराता गया।