धराली आपदा के बाद मुख्य सचिव ने उच्च हिमालयी झीलों का तत्काल विश्लेषण कराने के निर्देश
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Yugvarta
, Aug 11, 2025 10:34 PM 0 Comments
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Dehradun :
देहरादून 11 अगस्त, 2025 : मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने महानिदेशक उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद प्रो. दुर्गेश पंत को धराली (उत्तरकाशी) के ऊपर उच्च हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर और ग्लेशियल लेक का तत्काल विश्लेषण कर यथास्थिति से अवगत कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि ग्लेशियर पिघलने से बनने वाली झीलों और उनसे संभावित खतरों का आकलन कर तुरंत जानकारी दी जाए। इसके साथ ही प्रदेशभर के उच्च हिमालयी इलाकों को भी इस विश्लेषण में शामिल करने की बात कही।
मुख्य सचिव ने कहा कि धराली और ऋषिगंगा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को प्राथमिकता पर लेते हुए विश्लेषण कर त्वरित रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए, ताकि भविष्य में किसी अप्रिय घटना से होने वाले जान-माल के नुकसान को रोकने के लिए पूर्व तैयारियां सुनिश्चित की जा सकें। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में जहां झील बनने या उनके विस्तार की आशंका है, उन स्थानों को चिन्हित किया जाए। इस विश्लेषण के लिए उत्तराखण्ड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (यू-सैक) को नोडल एजेंसी नामित किया गया है। यह प्रक्रिया निरंतर चलने वाली होगी और यू-सैक को मजबूत किया जाना आवश्यक है।
मुख्य सचिव ने कहा कि नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी), इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट (आईआरएसएस) और इसरो से सभी प्रकार की सहायता और सामंजस्य के लिए यू-सैक ही नोडल एजेंसी होगी। उच्च हिमालयी झीलों की मॉनिटरिंग के लिए सेंसर लगाने के कार्य में तेजी लाने और एनआईएच से भी सहयोग लेने के निर्देश दिए गए।
इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव शैलेश बगौली, नितेश कुमार झा, सचिन कुर्वे, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, युगल किशोर पंत एवं विनोद कुमार सुमन सहित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयुक्त गढ़वाल विनय शंकर पाण्डेय उपस्थित थे।