Sambhal Violence Report : 78 साल में 30% घटी हिन्दू जनसंख्या, संभल हिंसा पर जांच रिपोर्ट में बड़े खुलासे
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Yugvarta
, Aug 28, 2025 03:40 PM 0 Comments
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Lucknow : लखनऊ, 28 अगस्त : नवंबर 2024 को संभल में हुई हिंसा पर तैयार करीब 450 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट तीन सदस्यीय समिति ने मुख्यमंत्री को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में कई अहम और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
78 साल में 30% घटी हिन्दुओं की आबादी
रिपोर्ट के अनुसार, 1947 में संभल नगरपालिका क्षेत्र में हिन्दू जनसंख्या 45 फीसदी थी, जो 2025 में घटकर मात्र 15 फीसदी रह गई है। यानी बीते 78 वर्षों में 30 फीसदी हिन्दू आबादी कम हुई है। समिति ने यह भी उल्लेख किया है कि आज़ादी के बाद से अब तक संभल में 15 दंगे
आज़ादी के समय से 'दंगो की आग' में झुलसता संभल-
•वर्ष 1947- सम्भल शहर के हिलाली सराय में मुस्लिम समुदाय द्वारा जगदीश शरण को पकड़ कर हत्या की गई ,जिसके बाद दंगा भड़का,कई हिंदुओ की जान गई।
•वर्ष 1953- शिया-सुन्नी संघर्ष हुआ,इसमे कई की जान गई,इसके अतिरिक्त 1956,1959,व 1966 में शहर में साम्प्रदायिक दंगे हुए।
•वर्ष 1962-जनसंघ के पूर्व विधायक महेश गुप्ता पर मुस्लिमों ने चाकू मारकर हमला किया,जिसमे वो घायल हुए,तत्पश्चात दंगे भड़के।
•वर्ष 1976-मस्ज़िद कमेटी के झगड़े में एक मुस्लिम ने मौलवी को मारा गया,और अफवाह उड़ाई कि एक हिंदू राजकुमार सैनी ने मौलवी को मारा,इसके बाद मुस्लिम दंगाइयों ने सूरजकुंड मंदिर व मानस मंदिर तोड़ दिया,इसके बाद दंगे भड़के, और शहर संभल में 7 दिन कर्फ्यू लगा।
•इसी 1976 के दंगे में लिप्त करीब 2 दर्जन लोगों को 2006 में सपा शासनकाल में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने तत्समय के आंदोलन(आपातकाल) का लोकतंत्र सेनानी घोषित किया था।
हो चुके हैं और क्षेत्र आतंकियों का अड्डा बन चुका है।
सर्वे की जानकारी हुई लीक-
रिपोर्ट में कहा गया है कि हिंसा के पीछे सर्वे की जानकारी का लीक होना भी एक कारण था। प्रशासन ने संभल जामा मस्जिद प्रबंधन को बताया था कि वहां सर्वे होना है। इसी जानकारी के लीक होने के बाद बड़ी संख्या में भीड़ इकट्ठा हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, इस क्षेत्र में अवैध हथियारों और नशीले पदार्थों का अड्डा भी बन चुका है।
हिंसा पूर्वनियोजित और सुनियोजित षड्यंत्र-
सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में बड़ा खुलासा किया गया है कि 24 नवंबर की हिंसा पूरी तरह पूर्वनियोजित और षड्यंत्र का हिस्सा थी। इसमें सांसद जिया-उर-रहमान बर्क, विधायक के पुत्र सुहैल इक़बाल और जामा मस्जिद इंतेज़ामिया कमेटी के पदाधिकारियों की मुख्य भूमिका रही।
22 नवंबर को नमाजियों को संबोधित करते हुए सांसद जिया-उर-रहमान बर्क ने कहा था –
“हम पुलिस प्रशासन सरकार से दबने वाले थोड़ी हैं, अरे हम इस देश के मालिक है नौकर, गुलाम नहीं हैं। मैं खुले रूप से कह रहा हूं कि, मस्जिद थी, मस्जिद है, इंशा-अल्ला मस्जिद रहेगी कयामत तक। जिस तरह अयोध्या में हमारी मस्जिद ले ली गई, वैसा यहाँ नहीं होने देंगे।”
कैबिनेट और विधानसभा में होगी रिपोर्ट पेश-
रिपोर्ट को सबसे पहले राज्य कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे आगामी विधानसभा सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें हिंसा के कारण, प्रशासन और खुफिया तंत्र की भूमिका, साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के सुझाव भी शामिल किए गए हैं।
जांच समिति ने किया विस्तृत अध्ययन-
हिंसा के तुरंत बाद गठित तीन सदस्यीय समिति ने मौके पर जाकर जांच की। समिति ने प्रशासनिक अधिकारियों, स्थानीय नागरिकों और पीड़ित परिवारों से बातचीत कर घटनाक्रम की पड़ताल की और उसके आधार पर यह विस्तृत रिपोर्ट तैयार की।